पीलीभीत में नगर पालिका की जमीन पर मंदिर निर्माण को लेकर विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को हिंदूवादी संगठनों द्वारा नगर पालिका की खाली भूमि पर मंदिर बनाने की कोशिश के बाद हालात बिगड़ गए। बिना अनुमति निर्माण की जिद को लेकर संगठनों का नगर पालिका व प्रशासन से टकराव हो गया।
घटनाक्रम की जानकारी लगते ही नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) संजीव कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। किसी भी अवैध निर्माण को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। ईओ ने साफ किया कि नगर पालिका की जमीन पर बिना अनुमति कोई भी निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
इसी बीच विवाद बढ़ने पर विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता शहर के नकटा दाना चौराहे पर एकत्रित हो गए और हाईवे जाम कर दिया। करीब दो किलोमीटर तक लंबा जाम लगने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। जाम से निकलने के दौरान एक ई-रिक्शा पलट गया, जिसमें एक महिला सिपाही समेत दो लोग घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने जबरन प्रदर्शनकारियों को हाईवे से हटाया और जाम खुलवाया।
इस दौरान धरना दे रहे कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच जमकर नोकझोंक हुई। सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से वार्ता की। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि नगर पालिका की भूमि पर किसी भी तरह का निर्माण नियम विरुद्ध है। यदि मंदिर या कोई अन्य निर्माण करना है तो संबंधित पक्ष को नियमानुसार लिखित अनुमति लेनी होगी, जिसके बाद प्रशासन विचार करेगा।
गौरतलब है कि लगभग एक दशक पहले भी इसी भूमि पर विवाद हुआ था, जब एक अस्थायी मठिया बनाकर निर्माण को बचाने की कोशिश की गई थी। तभी से यह जमीन विवादों का केंद्र बनी रही है।
फिलहाल प्रशासन और हिंदू संगठनों के बीच वार्ता जारी है। पुलिस बल मौके पर तैनात है और हालात को नियंत्रण में रखने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।
पीलीभीत का यह मामला अब जिले में बड़ी चुनौती बन चुका है, जहां एक ओर धार्मिक संगठन मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन नियमों और कानून के पालन पर जोर दे रहा है।




