पीलीभीत मेडिकल कॉलेज परिसर के सीटी स्कैन रूम में पैरामेडिकल प्रथम वर्ष की छात्रा कशिश पटेल पर धारदार चाकू से ताबड़तोड़ वार कर की गई निर्मम हत्या के मामले में अब एक बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जिस कॉलेज प्रबंधन और प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा पर कशिश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने और उसकी पुरानी शिकायतें दबाने का आरोप है, उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी संगीन दागों से भरा रहा है। पड़ताल में सामने आया है कि वर्तमान प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा के खिलाफ फिरोजाबाद में तैनाती के दौरान एक एमबीबीएस छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत गंभीर मुकदमा दर्ज हो चुका है।
मृतक छात्रा कशिश पटेल के चाचा विकास पटेल ने कहा कि हमारी भतीजी ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से 15 दिन पहले मामले की शिकायत की थी अगर उन्हें शिकायत की जानकारी थी तो परिजनों को इस मामले से मेडिकल कॉलेज प्रशासन को अवगत कराना चाहिए था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया ऐसे में प्राचार्य से लेकर सीटी स्कैन रूम में बैठने वाले अधिकारी भी घटना के लिए जिम्मेदार है, हम ऐसे लापरवाह अधिकारियों और प्राचार्य के खिलाफ लिखित शिकायत करेंगे और इन पर कार्रवाई की मांग करेंगे।
फ्लैशबैकः क्या था फिरोजाबाद का वह खुदकुशी कांड?
यह मामला दिसंबर 2022 का है, जब डॉ. संगीता अनेजा फिरोजाबाद के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में प्रिंसिपल के पद पर तैनात थीं। वहां एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के एक 24 वर्षीय छात्र शैलेंद्र शंखवार ने हॉस्टल के कमरा नंबर-42 में पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली थी। शैलेंद्र की मौत के बाद मेडिकल छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा था और छात्रों ने शव को सड़क पर रखकर नेशनल हाईवे-2 पर करीब दो घंटे तक चक्काजाम किया था।
उस दौरान छात्रों ने आरोप लगाया था कि प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा और उनका खास स्टाफ मिलकर छात्रों का मानसिक उत्पीड़न करता है, उन्हें परीक्षा में फेल करने की धमकी देता है और अवैध वसूली का खेल चलाता है। मृतक छात्र के पिता उदय सिंह शंखवार की तहरीर पर फिरोजाबाद पुलिस ने तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा, परीक्षा नियंत्रक और वार्डन समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC 306) और एससी/एसटी एक्ट में नामजद एफआईआर दर्ज की थी।
पीलीभीत और फिरोजाबादः दोनों जगह लापरवाही का पैटर्न बिल्कुल एक जैसा
शिकायत पर रवैयाः फिरोजाबाद में छात्र शैलेंद्र प्रताड़ना की शिकायत लगातार कर रहा था, जिसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। पीलीभीत में भी छात्रा कशिश ने आरोपी सागर की हरकतों की लिखित शिकायत की थी, लेकिन कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया गया।
मामला दबाने का तरीका: फिरोजाबाद में छात्रों पर
दबाव बनाया गया और सच बाहर आने से रोकने के लिए प्रशासनिक धमकियां दी गईं। वहीं पीलीभीत में आरोपी छात्र सागर से कशिश का जबरन ‘समझौता’ करा दिया गया और उसे कुछ दिनों की छुट्टी पर भेज दिया गया।
वारदात के बाद का रुखः फिरोजाबाद में भी डॉ. अनेजा ने खुद को पाक-साफ बताने की कोशिश की थी। पीलीभीत में भी परिजन जब मिलने पहुंचे, तो प्रिंसिपल बंद कमरे में उनसे ही उलझ गईं और लिखित शिकायत मिलने की बात से ही मुकर गईं।
बड़ा सवालः ‘सुपर स्पेशलिटी’ के बड़े-बड़े दावे, फिर प्राइवेट अस्पताल क्यों भेजा?
इस जघन्य हत्याकांड ने पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध ‘सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं’ के दावों की पूरी तरह से हवा निकाल दी है। सरकार द्वारा जिले को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से इस राजकीय संस्थान को स्थापित किया गया था, ताकि गंभीर मरीजों को लखनऊ या बरेली न भागना पड़े। लेकिन इस घटना ने कड़वी हकीकत बयां कर दी है।
चाकू के ताबड़तोड़ हमलों के कारण कशिश की गर्दन की मुख्य रक्त वाहिनी (Vascular Vessels) कट गई थी। उसे तत्काल वैस्कुलर सर्जरी और विशेषज्ञ ट्रॉमा केयर की जरूरत थी। करोड़ों के इस भव्य मेडिकल कॉलेज में आपातकाल के समय न तो कोई वैस्कुलर सर्जन मिला और न ही कोई विभागाध्यक्ष (HOD) इमरजेंसी में झांकने आया। प्राथमिक उपचार के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई और अंततः वेंटिलेटर एम्बुलेंस से उसे बरेली के एक निजी अस्पताल (SRMS) रेफर कर दिया गया जो उसने दम तोड़ दिया।
मर्डर के 24 घंटे बाद भी सुरक्षा ढांचा ‘ढाबा’ जैसा, बिना वेरिफिकेशन काम कर रहे कर्मी हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात के अगले दिन भी कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही रेंगती नजर आई। मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के जरिए तैनात कई कर्मचारियों का कोई पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) तक नहीं हुआ है और न ही उन्हें आधिकारिक नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। इस सिंडिकेट और अनियमितता की शिकायतें पहले भी कमिश्नर और आईजीआरएस पोर्टल पर की जा चुकी हैं, लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने फाइलों को दबाए रखा, जिसके कारण आज कैंपस अपराधियों और अराजक तत्वों का अड्डा बन चुका है।
बैकफुट पर आई प्रिंसिपलः डैमेज कंट्रोल के लिए जारी की प्रेस विज्ञप्ति चौतरफा घिरने और अपनी दागी छवि के उजागर होने के बाद डैमेज कंट्रोल के लिए प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की है। घटना के बाद प्रिंसिपल ने कॉलेज स्टाफ के साथ बैठक कर दिवंगत छात्रा की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर शोकसभा आयोजित की। कैंपस की सुरक्षा के लिए संबंधित विभाग से पूर्व सैनिकों (Ex-Army Personnel) की मांग की गई है, जिसके तहत फिलहाल दो प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों ने कार्यभार संभाला है। साथ ही हॉस्टल वॉर्डन को तुरंत कमरा आवंटित करने और सीसीटीवी दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।


