पीलीभीत। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्ष पद को लेकर चल रही शह-मात की खेल में हाईकमान ने एक बड़ा दांव चल दिया है। जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने का ख्वाब देख रहे कई रसूखदार और ‘रैली-समारोहों’ वाले युवा नेताओं को पार्टी नेतृत्व ने तगड़ा झटका दिया है। हाईकमान ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर चमकने या बड़े नेताओं की परिक्रमा करने वाले नहीं, बल्कि जमीन पर पसीना बहाने वाले निष्ठावान कार्यकर्ता ही पदाधिकारी बनेंगे।
क्या है नया पेंच?
पार्टी ने इस बार पदों पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे नेताओं के लिए दो बार की सक्रिय सदस्यता (Active Membership) अनिवार्य कर दी है। इस एक नियम ने पीलीभीत भाजपा के भीतर खलबली मचा दी है।
‘सफेदपोश’ दावेदारों की उड़ी नींद
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पीलीभीत में युवा मोर्चा अध्यक्ष पद के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक युवा नेता पिछले कई महीनों से लॉबिंग कर रहे थे। बड़े नेताओं के दौरों पर फूल-मालाएं लेकर सबसे आगे दिखने वाले इन चेहरों की हकीकत जब सांगठनिक रिकॉर्ड में खंगाली गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
बड़ा खुलासा: अध्यक्ष पद की मजबूत दावेदारी ठोक रहे कई चमकीले युवा नेताओं के पास पार्टी की दो बार की सक्रिय सदस्यता तो दूर, इस बार की भी वैलिड सक्रिय सदस्यता नहीं है।
अब हालत यह है कि जो नेता कल तक अपनी जीत तय मानकर मिठाइयां बांटने की तैयारी में थे, वे अब अपने संगठन मंत्रियों और आकाओं के चक्कर काट रहे हैं।
अब सबसे बड़ा और रोचक सवाल पीलीभीत के राजनीतिक गलियारों में यह तैर रहा है कि:
क्या बड़े नेताओं के ‘चहेते’ युवाओं को एडजस्ट करने के लिए हाईकमान इस कड़े नियम को दरकिनार करेगा?
या फिर संगठन के प्रति वफादार और नियमों पर खरे उतरने वाले किसी शांत, जमीनी कार्यकर्ता की लॉटरी लगेगी?
फिलहाल, हाईकमान के इस कड़े रुख से साफ है कि भाजपा युवाओं की इस फौज में पैराशूट लैंडिंग के मूड में बिल्कुल नहीं है। इस फैसले ने उन कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जगा दी है जो सालों से दरी बिछा रहे हैं, जबकि ‘रसूखदारों’ के पसीने छूट रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि युवा मोर्चा की कमान किस ‘सक्रिय’ चेहरे के हाथ आती है।


